हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि जब भी हम सुबह की चाय के साथ समोसा, कचौड़ी, जलेबी या पकोड़े खाते हैं, तो उन्हें अखबार (Newspaper) पर रख लेते हैं। यहाँ तक कि घर की रसोई में भी तली हुई चीजों का एक्स्ट्रा तेल सुखाने के लिए अक्सर अखबार का ही इस्तेमाल किया जाता है। सड़क किनारे मिलने वाले स्ट्रीट फूड वेंडर तो सालों से अखबार में ही खाना लपेटकर (Wrap) ग्राहकों को देते आ रहे हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत आपको कैंसर और लिवर जैसी जानलेवा बीमारियों की तरफ धकेल रही है?
इसी गंभीर खतरे को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI – Food Safety and Standards Authority of India) ने अखबार में खाना पैक करने, परोसने या उस पर रखकर खाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि FSSAI ने अखबार पर खाना खाने पर प्रतिबंध क्यों लगाया है (FSSAI ban eating on newspaper), इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं और यह हमारी सेहत को कैसे नुकसान पहुँचाता है।
FSSAI ने अखबार पर खाना परोसने पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
FSSAI ने देश के सभी फूड बिजनेस ऑपरेटरों (ढाबों, रेस्तरां, स्ट्रीट वेंडर्स) और आम नागरिकों के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। FSSAI के अनुसार, अखबारों की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही (Ink) और उनके स्टोरेज का तरीका इंसानी शरीर के लिए एक धीमे जहर (Slow Poison) की तरह काम करता है।
जब कोई भी गर्म या तैलीय (Oily) खाना अखबार पर रखा जाता है, तो भोजन की गर्मी और तेल के कारण अखबार की स्याही पिघलकर खाने में चिपक जाती है। जब हम उस खाने का सेवन करते हैं, तो वह खतरनाक केमिकल हमारे पेट में चले जाते हैं।
अखबार पर खाना खाने के 5 सबसे बड़े नुकसान (Health Risks of Eating on Newspaper)
अखबार की स्याही में कई तरह के हानिकारक केमिकल्स, सॉल्वैंट्स और भारी धातुएं (Heavy Metals) होती हैं। इससे होने वाले मुख्य नुकसान निम्नलिखित हैं:
1. कैंसर का खतरा (Bioactive Materials & Cancer)
अखबार की स्याही को सुखाने और उसे चमकदार बनाने के लिए कई तरह के वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) और रसायनों का उपयोग किया जाता है। जब यह स्याही हमारे पेट में जाती है, तो यह शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है, जिससे कैंसर (विशेषकर पेट और कोलन का कैंसर) होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
2. लिवर और किडनी को नुकसान (Lead Poisoning)
छपाई की स्याही में लेड (सीसा) और कैडमियम जैसे भारी तत्व पाए जाते हैं। हमारा शरीर इन भारी धातुओं को आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता। धीरे-धीरे ये तत्व हमारे लिवर और किडनी में जमा होने लगते हैं, जिससे ऑर्गन फेलियर (Organ Failure) या किडनी की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
3. पाचन तंत्र का खराब होना (Digestive Issues)
अखबार पर रखा हुआ खाना खाने से पेट में टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) जमा हो जाते हैं। इसके कारण पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी, उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से पाचन शक्ति पूरी तरह कमजोर हो जाती है।
4. हार्मोनल असंतुलन और बांझपन (Hormonal Imbalance)
शोध के अनुसार, अखबार की स्याही में ऐसे तत्व भी होते हैं जो शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) को प्रभावित करते हैं। इससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है, जिसका सीधा असर पुरुषों और महिलाओं की प्रजनन क्षमता (Fertility) पर पड़ता है।
5. बैक्टीरिया और इंफेक्शन का खतरा
अखबार छपने से लेकर हमारे घर तक पहुँचने के बीच कई हाथों से गुजरता है। इसे वेंडर्स द्वारा खुले में, धूल-मिट्टी और अस्वास्थ्यकर जगहों पर स्टोर किया जाता है। ऐसे में अखबार की सतह पर लाखों अदृश्य बैक्टीरिया और वायरस चिपक जाते हैं। जब इस पर गर्म खाना रखा जाता है, तो ये बैक्टीरिया खाने के जरिए हमारे शरीर में पहुंचकर फूड पॉइजनिंग और अन्य संक्रमण फैलाते हैं।
अखबार बनाम सुरक्षित विकल्प (Comparison Table)
अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आपको आज ही अपनी आदतें बदलनी होंगी। आइए देखते हैं कि अखबार की जगह आप किन सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
| असुरक्षित माध्यम (Avoid This) | सुरक्षित और हेल्दी विकल्प (Use This Instead) |
| अखबार (Newspaper): केमिकल और जहरीली स्याही से युक्त। | बटर पेपर (Butter Paper): तेल सोखने के लिए पूरी तरह सुरक्षित। |
| रीसाइकल्ड पेपर: इसमें भी पुरानी स्याही के अंश होते हैं। | टिश्यू पेपर (Tissue Paper): अनब्लिच्ड या फूड-ग्रेड टिश्यू का उपयोग करें। |
| प्लास्टिक थैलियां: गर्म खाने से प्लास्टिक पिघलकर जहर बनती है। | केले के पत्ते (Banana Leaves): पारंपरिक, एंटी-बैक्टीरियल और सबसे शुद्ध। |
| एल्युमिनियम फॉयल: अत्यधिक गर्म और खट्टी चीजों के लिए नुकसानदेह। | स्टेनलेस स्टील के बर्तन: घर पर खाना रखने का सबसे बेस्ट तरीका। |
FSSAI के नियम और कानून क्या कहते हैं?
FSSAI ने साफ कर दिया है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन के तहत फूड पैकेजिंग के लिए अखबार या रीसाइकिल किए गए कागज का इस्तेमाल करना एक दंडनीय अपराध है।
- यदि कोई दुकानदार या स्ट्रीट वेंडर अखबार में खाना पैक करके देता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और उसका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।
- FSSAI ने देश भर के फूड कमिश्नरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने राज्यों में स्थानीय बाजारों का निरीक्षण करें और इस नियम को सख्ती से लागू करवाएं।
एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमारी भूमिका
सिर्फ सरकार या FSSAI के नियम बनाने से बदलाव नहीं आएगा, इसके लिए हमें खुद जागरूक होना होगा:
- दुकानदार को टोकें: यदि आपका पसंदीदा चाट वाला या हलवाई अखबार पर खाना दे रहा है, तो उससे विनम्रता से मना करें और उसे प्लेट या पत्ते पर खाना देने को कहें।
- जागरूकता फैलाएं: अपने घर के सदस्यों, काम करने वाली बाई और आस-पड़ोस के लोगों को इसके वैज्ञानिक नुकसानों के बारे में बताएं।
- घर में बदलाव करें: रसोई में पूरियां, पकोड़े या पराठे का एक्स्ट्रा तेल सुखाने के लिए अखबार की जगह हमेशा अच्छी क्वालिटी के Food-grade Absorbent Paper या सूती कपड़े का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
सेहत से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं है। चंद रुपयों के टिश्यू पेपर या बटर पेपर को बचाने के चक्कर में हम अखबार का इस्तेमाल करके अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। अखबार पर रखकर खाना खाने पर FSSAI का प्रतिबंध (FSSAI ban eating on newspaper) हमारे भले के लिए ही लगाया गया है।
तो आज ही से संकल्प लें कि न तो खुद अखबार पर रखा खाना खाएंगे और न ही अपने परिवार को खाने देंगे। सुरक्षित रहिए, जागरूक रहिए और स्वस्थ रहिए!
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. FitFab इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)